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ख़ुद को यदि बदले नहीं , बढ़ जाएगी आग -- कवि तारकेश्वर मिश्र "जिज्ञासु"

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                 कोरोनावायरस का उपचार

         कोरोना के खौफ़ का , करिए यह उपचार ! 

       घर पर ही रहकर सदा , हाथ धुलो बहु बार !! 


         कोरोना संक्रमण का , यह भी एक इलाज ! 

         प्रातः से तुम शाम तक , घर ठहरो जिज्ञासु !! 


            कोरोना की आग में , डूबे इटली चीन ! 

       तुम मत अब यह पूछना , हम कितने गमगीन !! 


          कोरोना के जाल में ,  जकड़ा है संसार ! 

          संकट की इस घड़ी में , करिए बेड़ा पार !!


         कोरोना से हम बचें , और बचे संसार ! 

        प्रभु की कृपा बनी रहे , संकट से हों पार !! 


         घर में यदि बैठे रहो , होगा कोरोना पस्त ! 

      कुछ दिन की ही बात है , हो जाएगा अस्त !! 


         कोरोना देख जनता , हुई बहुत बेहाल ! 

      ऐसे कुछ दिन रहेगा , हम लोगों का हाल !! 


       हम अभी तक सुने नहीं , कोरोना की बात ! 

       अब तो ऐसा हो गया , सुनते हैं दिन-रात !! 


      अपनाकर शाकाहार , कह कोरोना भाग ! 

     ख़ुद को यदि बदले नहीं , बढ़ जाएगी आग ! 

       (तारकेश्वर मिश्र "जिज्ञासु")

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