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Lockdown के 67वें दिन जीडीपी वृद्धि दर के सबसे कमजोर आंकड़े सामने आये

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उत्तराखंड में शुक्रवार को एक दिन में रिकॉर्ड 216 लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके साथ ही प्रदेश में कुल कोविड-19 मरीजों की संख्या बढ़कर 716 हो गई है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन में यह जानकारी दी गयी है।

केन्द्र सरकार राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को लेकर अपनी भूमिका को सीमित करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में एक जून से कड़े प्रतिबंध लगाने या अतिरिक्त छूट देने पर निर्णय लेने की छूट दे सकती है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। केन्द्र सरकार हालांकि देश में सबसे ज्यादा प्रभावित 30 नगरपालिका क्षेत्रों में कोविड-19 निरूद्ध क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंधों को जारी रखने के लिए राज्य के अधिकारियों को सलाह दे सकती है। ये 30 नगरपालिका क्षेत्र महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब और ओडिशा से हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ''इस बात की पूरी संभावना है कि एक जून से प्रतिबंध लगाने या छूट देने के संबंध में केंद्र की बहुत सीमित भूमिका होगी। राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश स्थानीय स्तर पर इस तरह के मुद्दों पर निर्णय लेंगे।’’ केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन के साथ-साथ मॉल और सिनेमा हॉल को बंद रखना जारी रख सकती है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों पर लोगों द्वारा फेस मास्क पहनना अनिवार्य करने और हर स्थान पर सामाजिक दूरी बनाये रखने के नियमों का पालन करने का आदेश दे सकती है। स्कूलों को फिर से खोलने या मेट्रो ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने पर राज्यों को निर्णय लेने की अनुमति दी जा सकती है। लॉकडाउन शुरू होने के बाद 25 मार्च से बंद धार्मिक स्थलों पर निर्णय लेने की अनुमति राज्यों को दी जा सकती है। कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को 21 दिन का राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाने की घोषणा की थी। इसे पहली बार तीन मई को और फिर इसे 17 मई को बढ़ाया गया था। चौथे चरण में लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ाया गया था। केन्द्र सरकार मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई समेत 30 शहरों में कोविड-19 की स्थिति को लेकर विशेष रूप से चिंतित है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने बृहस्पतिवार को इन 30 शहरों में से 13 के नगरपालिका आयुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ एक बैठक की थी और वायरस से निपटने के लिए उनके कार्यों का जायजा लिया था। ये 13 शहर चेन्नई, दिल्ली/नई दिल्ली, अहमदाबाद, ठाणे, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता/हावड़ा, इंदौर, जयपुर, जोधपुर, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को सभी मुख्यमंत्रियों से बात की थी और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को 31 मई के बाद बढ़ाए जाने पर उनके विचार जाने थे। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने राज्यों से उनकी चिंता के विषयों के बारे में जानकारी ली थी और यह जाना था कि एक जून से वे और किन क्षेत्रों को खोलना चाहते हैं। शाह के साथ बातचीत के बाद गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा था कि उनका मानना है कि लॉकडाउन को और 15 दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है। केन्द्र सरकार बड़े शहरों या वायरस प्रभावित क्षेत्रों से प्रवासी श्रमिकों और अन्य लोगों के पहुंचने के बाद बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को भी ध्यान में रख रही है। देश में शुक्रवार को कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़कर 1,65,799 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण देश में मृतकों की संख्या बढ़कर 4,706 हो गई है।

टिकट जांच करने वाले कर्मचारियों के लिये दिशा-निर्देश


भारतीय रेल के 167 के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब रेलगाड़ियों में टिकट की जांच करने वाले कर्मचारी अपने पारंपरिक काले कोट एवं टाई नहीं पहनेंगे। एक जून से शुरू होने वाले 100 जोड़ी ट्रेनों में सवार टिकट जांच करने वाले कर्मचारियों के लिये कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर रेलवे ने दिशा निर्देश जारी किये हैं जिसके अनुसार उन्हें मास्क, दस्ताने और साबुन के अलावा आतिशी शीशा दिया जायेगा। रेलवे की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, 'कोरोना संक्रमण को रोकने अथवा उसके खतरे को कम करने के मद्देनजर टिकट जांच करने वाले कर्मचारियों के लिये कोट एवं टाई की अनिवार्यता समाप्त की जा सकती है। हालांकि, वह इस दौरान अपने नाम ओर पद अंकित बैज पहने रहेंगे।' इसमें यह भी कहा गया है कि ट्रेनों में टिकटों की जांच करने वाले सभी टीटीई कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये उन्हें पर्याप्त संख्या में मास्क, फेस शील्ड, दस्ताने, सिर ढंकने का कवर, सेनेटाइजर, साबुन समेत अन्य वस्तुएं मुहैया करायी जायेंगी। इसमें यह भी कहा है कि यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा सकती है कि टीटीई वास्तव में सुरक्षात्मक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। इसमें कहा गया है कि ट्रेन में सवार टिकट जांच कर्मचारियों को अगर संभव हुआ तो आतिशी शीशा (मैग्निफाइंग ग्लास) दिया जायेगा ताकि वह दूर से ही टिकटों का विवरण देख सकें और शारीरिक संपर्क से बच सकें।

चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 3.1 प्रतिशत पर


देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में घटकर 3.1 प्रतिशत पर आ गई है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत रही थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। इस तरह पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि दर गिरकर 4.2 प्रतिशत रह गई है। उपभोग और निवेश में गिरावट की वजह से जीडीपी की वृद्धि दर का आंकड़ा नीचे आया है। आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार 4.2 प्रतिशत रही है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में 6.1 प्रतिशत रही थी। यह 2008-09 के बाद जीडीपी की वृद्धि दर का सबसे कमजोर आंकड़ा है। 2008-09 में आर्थिक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत रही थी। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए सरकार ने 25 मार्च को लॉकडाउन लगाया था। जनवरी-मार्च के दौरान दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां सुस्त रहीं, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। एनएसओ ने इस साल जनवरी और फरवरी में जारी पहले और दूसरे अग्रिम अनुमान में वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। कोरोना वायरस महामारी की वजह से जनवरी-मार्च, 2020 के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस बीच, सीएसओ ने बीते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के वृद्धि दर के आंकड़े को घटा कर 4.7 की जगह 4.1 प्रतिशत कर दिया है। इसी तरह बीते वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के आंकड़ों को भी क्रमश 5.6 से कम कर 5.2 प्रतिशत और 5.1 की जगह 4.4 प्रतिशत किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में चौथी तिमाही में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में इसमें 2.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। हालांकि, कृषि क्षेत्र का जीवीए चौथी तिमाही में बढ़कर 5.9 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो एक साल पहले समान तिमाही में 1.6 प्रतिशत था। निर्माण क्षेत्र का जीवीए चौथी तिमाही में 2.2 प्रतिशत घटा, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में यह 6 प्रतिशत बढ़ा था। वहीं खनन क्षेत्र की वृद्धि दर समीक्षाधीन तिमाही में 5.2 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इसमें 4.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। आंकड़ों के अनुसार चौथी तिमाही में बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य सार्वजनिक सेवाओं की वृद्धि दर 4.5 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 5.5 प्रतिशत रही थी। इसी तरह व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण से संबंधित सेवाओं में चौथी तिमाही में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि एक साल पहले समान तिमाही में इन क्षेत्र की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रही थी। समीक्षाधीन अवधि में वित्तीय, रीयल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर 8.7 से घटकर 2.4 प्रतिशत रही गई। लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की वृद्धि दर में भी गिरावट आई और यह 10.1 प्रतिशत पर आ गई। एक साल पहले समान तिमाही में यह 11.6 प्रतिशत रही थी। आंकड़ों के अनुसार, चौथी तिमाही में स्थिर (2011-12) मूल्य पर जीडीपी 38.04 लाख करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 36.90 लाख करोड़ रुपये रही थी। पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में वास्तविक जीडीपी या स्थिर मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद 145.66 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 31 जनवरी, 2020 को जारी पहले संशोधित अनुमान में इसके 139.81 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। मौजूदा मूल्य पर बीते वित्त वर्ष में प्रति व्यक्ति आय 1,34,226 रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। यह इससे पिछले वित्त वर्ष के 1,26,521 करोड़ रुपये के आंकड़े से 6.1 प्रतिशत अधिक है। इस बीच, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी अलग आंकड़ों के अनुसार कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के चलते अप्रैल में आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 38.1 प्रतिशत घटा है।

चिदंबरम भड़के


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में कमी को लेकर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि यह गिरावट भाजपा सरकार के आर्थिक प्रबंधन की कहानी बयान कर रही है। पूर्व वित्त मंत्री ने ट्वीट किया, ''हमारा आकलन था कि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में जीडीपी चार फीसदी के नीचे रहेगी। यह और भी खराब स्थिति में रही और 3.1 फीसदी पर लुढ़क गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘याद रखिए, यह स्थिति लॉकडाउन के पहले की है। चौथी तिमाही के 91 दिनों में से सिर्फ सात दिन ही लॉकडाउन में पड़े हैं। यह भाजपा सरकार के आर्थिक प्रबंधन की कहानी बयां कर रहा है।’’ गौरतलब है कि जीडीपी की वृद्धि दर बीते वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में घटकर 3.1 प्रतिशत पर आ गई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत थी। बीते पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ गई है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 6.1 प्रतिशत थी।

 विमान के जरिए वापस लाने का प्रबंध किया


सैंकड़ों किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करके अपने घर लौटने को मजबूर हुए प्रवासी मजदूरों की मार्मिक कहानियों के बीच झारखंड सरकार ने शुक्रवार को लद्दाख में फंसे अपने राज्य के 60 श्रमिकों को विमान के जरिए वापस लाने की पहल करके एक उम्मीद की किरण दिखायी है। ये सभी प्रवासी मजूदर लद्दाख में सीमा सड़क संगठन परियोजना में कार्यरत थे। दो महीने के तनाव और अनिश्चितता के बाद 60 मजदूरों का यह समूह विमान के जरिए दोपहर को नयी दिल्ली पहुंचा और फिर यहां से शाम को अपने गृह राज्य झारखंड की उड़ान में सवार हुआ। सोमवार से घरेलू यात्री उड़ान शुरू होने के बाद से कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें संस्थानों अथवा नियोक्ताओं ने फंसे हुए श्रमिकों को विमान के जरिए वापस भेजने का प्रबंध किया। यद्यपि, यह पहला मामला है, जब किसी राज्य सरकार ने एक साथ कई प्रवासी मजदूरों को वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए लाने का प्रबंध किया हो। अधिकारियों ने कहा कि झारखंड के दुमका जिले के रहने वाले मजदूर कारगिल जिले के बटालिक में फंसे हुए थे। सभी मजदूरों को चिकित्सीय परीक्षण के बाद सीमा सड़क संगठन की सहायता से बृहस्पतिवार को लेह लाया गया और उन्हें शिविर में ठहराया गया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट किया, 'हम अपने प्रवासी मजूदरों को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारी सरकार 60 मजदूरों को विमान के जरिए वापस ला रही है जोकि बटालिक-कारगिल में फंसे हुए थे। उन्हें लेह से रांची लाया जा रहा है।' सोरेन ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अंडमान-निकोबार, लद्दाख और उत्तर-पूर्वी राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को निजी विमान के जरिए वापस लाने की अनुमति देने की मांग की थी क्योंकि वहां से मजदूरों को वापस लाने के लिए कोई अन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक सूत्र ने कहा, 'हालांकि, केंद्र की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए वाणिज्यिक उड़ानों का प्रबंध किया।' उन्होंने कहा कि मजदूरों को वापस लाने के लिए करीब आठ लाख रुपये का खर्च आया। सूत्र ने कहा कि मजदूरों का समूह स्पाइसजेट की उड़ान के जरिए लेह हवाईअड्डे से राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा। फिर दिल्ली हवाई अड्डे से इंडिगो की उड़ान से छह बजे रांची के लिए उड़ान भरी। लेह हवाई अड्डे से एक प्रवासी मजदूर जॉन पोलस हंसदा ने फोन पर कहा, 'हमारे कुछ लोग इस बात की उम्मीद खो चुके थे कि वे दोबारा अपने परिवार को देख सकेंगे लेकिन मैंने मजूदरों से कहा कि हम अपने गांव लौटेंगे। मैंने झारखंड सरकार से संपर्क किया, जिसने तत्काल प्रतिक्रिया दी और हमारी वापसी का प्रबंध किया।'


बीएमसी ने अदालत को दी जानकारी


बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि हालांकि उसका निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के वित्तीय प्रबंधन पर कोई नियंत्रण या अधिकार नहीं है, लेकिन उसने कोविड-19 मरीजों के लिए बेड और आईसीयू के शुल्क की सीमा तय की है। बीएमसी ने एक हलफनामा शहर निवासी सारिका सिंह की ओर से दायर उस जनहित याचिका के जवाब में दायर किया जिसमें दावा किया गया था कि यहां निजी अस्पताल या तो कोविड-19 मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं या उनके इलाज के लिए अधिक शुल्क वसूल रहे हैं। हलफनामे में कहा गया है कि बीएमसी, निजी इकाइयों और गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वय को लेकर हर कदम उठा रही है। इसमें कहा गया है कि बीएमसी कोविड-19 महामारी से निपटने और मुंबई के नागरिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की रक्षा करने के लिए सभी कदम उठा रही है और उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है। हलफनामे में कहा गया, ‘‘निजी अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्क की सीमा तय करने को लेकर बीएमसी का निजी अस्पतालों के वित्तीय प्रबंधन पर कोई नियंत्रण या अधिकार नही है।’’ उसने कहा कि बीएमसी ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कोविड-19 मरीजों को पृथक इकाई मुहैया कराने की इजाजत दी है और वह इस आशंका से अवगत है कि ऐसे अस्पताल मरीजों से अधिक शुल्क वसूल सकते हैं। बीएमसी ने कहा, ‘‘इसके समाधान के लिए कोविड-19 मरीजों को पृथक इकाई की सुविधा मुहैया कराने वाले सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को गत अप्रैल में एक नोटिस जारी किया गया था और उनसे बेड शुल्क की सीमा तय करने को कहा था। हालांकि इन अस्पतालों को बिल में दवा, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और अन्य शुल्क लगाने की इजाजत दी जाएगी।’’ हलफनामे में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से जारी दिशानिर्देश के अनुसार कोविड-19 मरीजों एवं संदिग्धों के लिए तीन तरह की सुविधाएं हैं। हलफनामे में कहा गया है, ‘‘कोविड केयर सेंटर (सीसीसी) की स्थापना हल्के या बिना लक्षण वाले कोविड-19 मरीजों या कोविड-19 संदिग्ध मामलों के लिए की गई है। ये सुविधाएं होटल, हॉस्टल, स्कूल और लॉज में स्थापित की गई हैं। समर्पित कोविड-19 स्वास्थ्य केंद्र (डीसीएचसी) ऐसे मामलों के लिए स्थापित किए गए हैं जो चिकित्सकीय रूप से मध्यम के तौर पर पहचाने गए हैं। हलफनामे में कहा गया है कि निर्दिष्ट कोविड अस्पताल (डीसीएच) गंभीर श्रेणी वाले मरीजों के लिए हैं।’’ हलफनामे के अनुसार वर्तमान में 30,268 बेड वाले 318 सीसीसी, 11,098 बेड वाली 38 डीसीएचसी सुविधाएं और 10,203 बेड वाली 76 डीसीएच सुविधाएं हैं। हलफनामे में कहा गया कि 23 मई तक की स्थिति के अनुसार शहर में 6,197 निरुद्ध क्षेत्र हैं जिसकी नियमित तौर पर निगरानी बीएमसी द्वारा की जा रही है।


जुर्माना राशि बढ़ाई


पंजाब सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों का पालन नहीं करने वालों के लिए सख्त जुर्माना लगाये जाने की शुक्रवार को घोषणा की। राज्य में अब सार्वजनिक स्थानों पर थूकने और मास्क नहीं पहनने पर 500 रुपये का जुर्माना देना होगा। राज्य सरकार ने घर में पृथक रहने संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए जुर्माने की राशि को बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया है। इससे पहले राज्य सरकार ने मास्क नहीं पहनने के लिए 200 रुपये, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने के लिए 100 रुपये और घर में पृथक रहने संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए 500 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया था। दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी से पंजाब को सुरक्षित रखने के लिए जुर्माना राशि को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने दुकानों या वाणिज्यिक स्थानों के मालिकों द्वारा सामाजिक दूरी बनाये रखने संबंधी नियमों का उल्लंघन करने के लिए जुर्माना राशि 2,000 रुपये तय की है। सिद्धू ने कहा कि सामाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए बसों के मालिकों पर तीन हजार रुपये, कारों पर दो हजार रुपये, ऑटो-रिक्शा और दोपहिया वाहनों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा। उन्होंने कहा कि अमरिंदर सिंह सरकार इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए दिन-रात काम कर रही है।


गंतव्य पर पहुंचने में लगे 72 घंटे


ट्रेनों के भटक जाने की खबरों पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने शुक्रवार को कहा कि एक मई से जब से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलने लगी हैं, तब से अब तक कुल 3840 ऐसी ट्रेनों में केवल चार ट्रेनों ने ही अपने गंतव्य पर पहुंचने में 72 घंटे लिये। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रवासी ट्रेनों में 90 फीसद ट्रेनें नियमित मेल एक्सप्रेस ट्रेनों से अधिक औसत रफ्तार से चलीं। यादव ने कहा, ''20-24 मई के दौरान, उत्तर प्रदेश और बिहार से अधिक मांगें होने के कारण 71 ट्रेनों के मार्ग बदले गये, क्योंकि देशभर से 90 फीसद ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार ही जा रही थीं।’’ बिहार के लिए 51 ट्रेनों, उत्तर प्रदेश के लिए 16, झारखंड के लिए दो और मणिपुर के एक ट्रेन के मार्ग में परिवर्तन किया गया। मार्ग परिवर्तन वाली ट्रेनें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और राजस्थान से चली थीं। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब विलंब को लेकर यहां तक कह दिया गया कि प्रवासी ट्रेनें अपने गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही गायब हो रही हैं। यादव के अनुसार 28 मई तक 3840 ट्रेनों ने 52 लाख यात्रियों को पहुंचाया। उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में 1524 श्रमिक ट्रेनें चली हैं और 20 लाख से अधिक यात्री पहुंचाये गये। उन्होंने कहा, ‘‘रेलवे ने भेजने वाले राज्यों के कभी सभी अनुरोधों को समायोजित किया और हम श्रमिकों की आवाजाही की सभी मांग पूरा करने के लिए तैयार हैं।’’ अध्यक्ष ने कहा, ''फिलहाल हमारे पास 492 ट्रेनों की मांग है।’’ यादव ने यह भी कहा कि रेवले ने उन लोगों की सूची तैयार की जो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में मर गये। उन्होंने साथ ही पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे, गर्भवती महिलाओ और बुजुर्गों से अनावयक यात्रा से बचने की अपील की।

 यात्रा नियमों में छूट की मांग की


जैन समाज के साधु संतों ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से संपर्क कर कोविड—19 के दृष्टिगत जारी लॉकडाउन के दौरान चतुर्मास के लिये यात्रा नियमों में छूट देने की मांग की। जैन साधु संत वार्षिक चतुर्मास के लिये पैदल चलते हैं और इस साल यह जुलाई में होना है। एक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन में प्रदेश कांग्रेस महासचिव सुमन अग्रवाल ने सैंकड़ों साधु संतों की बातों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया है जो इस वार्षिक उत्सव के दौरान विभिन्न राज्यों में पैदल यात्रा करते हैं। बयान में अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने साधुओं एवं साध्वियों के लिये यात्रा के दौरान उचित इंतजाम करने की मांग की है जो चतुर्मास उपवास शुरू होने के एक महीने पहले शुरू हो जाती है। कांग्रेस नेत्री ने कहा कि वास्तविकता यह है कि उनमें से कई लोगों ने राजमार्गों पर यात्रा प्रारंभ कर दी है और पैदल ही गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक तक की दूरी तय करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन साधु संतों को पुलिस से मदद और सुक्षा देने तथा लॉकडाउन के दौरान यात्रा प्रतिबंधों में छूट दिये जाने का आग्रह किया।


अफवाहों पर भरोसा न करें


गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शुक्रवार को लोगों से अपील की कि वह कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन से संबंधित अफवाहों पर भरोसा नहीं करें। लॉकडाउन का चौथा चरण 31 मई को समाप्त होने वाला है। रूपाणी को यह स्पष्टीकरण इसलिये देना पड़ा कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा चल रही है कि राज्य सरकार एक जून से पूर्ण लॉकडाउन करने की योजना बना रही है क्योंकि प्रदेश में कोविड—19 के मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'कुछ लोग यह अफवाह फैला रहे हैं कि राज्य सरकार पूर्ण लॉकडाउन का आदेश देगी। सब कुछ बंद करने का आदेश देगी। लोगों को इन अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिये और ऐसे चीजों के प्रसार से भी बचना चाहिये।' इससे पहले सोशल मीडिया पर उप मुख्यमंत्री नीतिन पटेल की तस्वीरों वाली पोस्ट वायरल हो गई थी जिसमें पूर्ण लॉकडाउन के बारे में कहा गया था। कोरोना वायरस महामारी के कारण देश भर में 25 मार्च से लॉकडाउन जारी है।


भारी जाम से परेशान हुए लोग


गुड़गांव और गाजियाबाद प्रशासन द्वारा दिल्ली से लगी अपनी सीमाएं सील करने के बाद शुक्रवार को सीमाओं पर भारी जाम की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हरियाणा सरकार के कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के मद्देनजर अंतर-राज्यीय सीमाएं सील करने की घोषणा के एक दिन बाद गुड़गांव ने यह कदम उठाया गया है। इससे पहले इस सप्ताह गाजियाबाद जिला प्रशासन ने भी कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए अंतर-राज्यीय सीमा सील कर दी थी। गाजियाबाद, नोएडा और गुड़गांव हालांकि अन्य राज्यों में आते हैं लेकिन इसके अधिकतर लोग काम करने के लिए या तो दिल्ली आते हैं या यहां से इन शहरों में लोग जाते हैं। गुड़गांव में एक निदान प्रयोगशाला में काम करने वाले रूचिर शर्मा ने कहा, ''पुलिस द्वारा लोगों को वहां ना जाने देने की वजह से सुबह काफी जाम था।’’ पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर के निवासी शर्मा ने कहा, ''नया आदेश देर रात आया, इसलिए किसी को कुछ पता नहीं था और पुलिस को भी निर्देश जारी नहीं किए गए थे। मुझे नहीं पता कि वे आवश्यक सेवाओं के लिए काम करने वाले लोगों को जाने दे रहे हैं या नहीं। पंक्तियां बेहद लंबी थी और वहां नाके तक पहुंचने में काफी समय लगता इसलिए मैंने वापस आने का निर्णय लिया।’’ वहीं, गाजियाबाद से आने-जाने वाले लोगों ने बताया कि वहां जांच काफी कड़ी कर दी गई है। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में रहने वाले राजेन्द्र सिंह यादव गाजियाबाद में एक मेडिकल स्टोर में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में पुलिस जांच काफी सख्त हो गई है, जिस वजह से सीमा पर काफी जाम लग गया। गाजियाबाद पुलिस के सहायक अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि वे सीमा पर जांच कर रहे हैं। अत्यावश्यक सेवाओं के लिए काम करने वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने भी माना कि पुलिस जांच की वजह से सीमाओं पर भारी जाम लग गया। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने शुक्रवार को लॉकडाउन को 31 मई के बाद भी बढ़ाने की वकालत की और दिल्ली सीमा पर सख्ती को सही ठहराते हुए कहा कि सरकार ने अगर इस तरह के उपाय नहीं किए तो राज्य में संक्रमण के मामले दिल्ली के बराबर पहुंच जाएंगे। दिल्ली से लगे हरियाणा के जिलों में कोरोना वायरस के मामले पिछले एक सप्ताह में बढ़ने का हवाला दते हुए विज ने राष्ट्रीय राजधानी से लगी सीमाओं को सील करने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया था। विज ने कहा, ''मैं नियमित रूप से स्थिति का आकलन कर रहा हूं। हम हर एक व्यक्ति की जान बचाना चाहते हैं, अगर हमने सीमाओं पर सख्ती नहीं रखी और लोगों को यूं ही आने-जाने दिया तो निश्चित रूप से हमारे मामले दिल्ली के बराबर पहुंच जाएंगे। हमें लोगों की आवाजाही रोकनी होगी।’’ वहीं दिल्ली पुलिस ने ट्विटर पर लोगों को जाम को लेकर आगाह भी किया। उन्होंने ट्वीट किया, ''सिंघु बार्डर पर हरियाणा पुलिस की जांच की वजह से दिल्ली से हरियाणा की ओर जाने वाली गाड़ियां बड़ी धीमी गति से जा रही हैं।’’ ऐसी ही स्थिति गौतम बुद्ध नगर में भी है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निवासियों को एक खुले पत्र में जिलाधिकारी सुहास एल. वाय ने बृहस्पतिवार को इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए नोएडा-दिल्ली सीमा पर ‘‘यथा स्थिति’’ बनाए रखने पर जोर दिया था।

 उत्तराखंड में एक जून से सरकारी कार्यालय पहले की तरह खुलेंगे


उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को राज्य सचिवालय तथा विधानसभा सहित अपने सभी शासकीय कार्यालयों को एक जून से लॉकडाउन से पहले की तरह खोलने का निर्णय किया है। प्रदेश के प्रभारी सचिव, पंकज कुमार पांडे द्वारा यहां इस संबंध में जारी एक आदेश में कहा गया है कि एक जून से प्रदेश के समस्त शासकीय कार्यालय लॉकडाउन से पूर्व की भांति प्रात: 10 से पांच बजे तक तथा राज्य सचिवालय और राज्य विधानसभा जैसे पांच दिवसीय कार्यालय प्रात: 9:30 से छह बजे तक खोले जाएंगे। आदेश के अनुसार, इस दौरान समूह 'क' और समूह 'ख' (क्लास वन और क्लास टू) के अधिकारियों की उपस्थिति शत प्रतिशत तथा समूह 'ग' और 'घ' (क्लास थ्री और क्लास फोर) के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति 50 प्रतिशत रहेगी। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को ही सरकार ने प्रदेश में बाजार खुलने के समय में भी वृद्धि की थी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में कोरोना वायरस से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बाजार खुलने के समय को बढ़ाते हुए सुबह सात बजे से शाम सात बजे करने का निर्णय लिया था।


चमगादड़ों की मौत की वजह


उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में बड़ी संख्या में चमगादड़ो के मरने की वजह गर्मी और लू थी। यह खुलासा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) बरेली से आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है। वन अधिकारी अविनाश कुमार ने शुक्रवार को बताया कि जिले के बेलाघाट इलाके और गोला इलाके में मंगलवार को बड़ी संख्या में चमगादड़ मृत पाए गए थे। इसके बाद लोगो में कोरोना वायरस और चमगादड़ के संबंध को लेकर भय पैदा हो गया था। इस घटना के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम ने चमगादड़ के नमूने जांच के लिए भेजे थे। वन अधिकारी कुमार ने बताया कि हालांकि अभी तक उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है लेकिन उनकी आईवीआरआई के डॉक्टरों से बात हुई है। डॉक्टरों ने बताया कि चमगादड़ों के नमूनों की कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी है और उनका मानना है कि चमगादड़ों की मौत लू लगने और गर्मी के कारण हुई है। बहुत से चमगादड़ गर्मी के कारण पेड़ से गिर गये और उनके सिर में चोट लग गयी है, यह भी मौत का एक कारण हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि चमगादड़ों की मृत्यु का मुख्य कारण लू लगना ही है।



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