स्मृति शेष: नहीं रहे विज्ञापन की दुनिया को रंगीन बनाने वाले पीयूष पांडे... पर उनका काम हमेशा जिंदा रहेगा

Oct 24, 2025 - 19:05
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स्मृति शेष:  नहीं  रहे विज्ञापन की दुनिया को रंगीन बनाने वाले पीयूष पांडे... पर उनका काम हमेशा जिंदा रहेगा
70 वर्ष की उम्र में पीयूष पांडे ने ली अंतिम सांस ( फोटो - इंस्टाग्राम)

नई दिल्ली( सहयोग मंत्रा)। भारतीय विज्ञापन जगत के महान रचनात्मकता के लिए पहचान बना चुके दिग्गज पियूष पांडे का बीते रोज 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय विज्ञापन की अनोखी और भावपूर्ण शैली का एक युग समाप्त हो गया।पांडे ने हर विज्ञापन में जीवंतता, संवेदनशीलता और लोगों के जीवन की झलक भरी। पांडे ने एक विज्ञापन एजेंसी में चार दशकों से अधिक समय तक काम करते हुए भारतीय विज्ञापन को नई पहचान और आवाज दी। अपने अनोखे अंदाज, हंसमुख व्यक्तित्व और गहरी समझ के साथ उन्होंने विज्ञापन को केवल उत्पाद प्रचार नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन से जुड़े अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। उनके नेतृत्व में एजेंसी दुनिया की सबसे पुरस्कार विजेता एजेंसियों में से एक बन गई और कई पीढ़ियों के रचनात्मक प्रतिभाओं को निखारने में मदद की।

जयपुर में जन्मे पांडे ने अपने करियर की शुरुआत बचपन में ही की, जब उन्होंने अपने भाई प्रसून पांडे के साथ मिलकर घरेलू उत्पादों के रेडियो जिंगल्स में आवाज दी। इससे पहले उन्होंने क्रिकेट, चाय की टेस्टिंग और निर्माण कार्य जैसे कई पेशों का अनुभव लिया। लेकिन 27 वर्ष की आयु में उन्होंने विज्ञापन उद्योग में कदम रखा और उस समय के अंग्रेजी और अभिजात वर्ग केंद्रित विज्ञापन जगत को पूरी तरह बदल दिया। पांडे द्वारा बनाए गए अभियान जैसे रंगों का एक ब्रांड, चॉकलेट का एक ब्रांड, एक चिपकने वाला उत्पाद और एक दूरसंचार कंपनी आज भी भारतीय विज्ञापन जगत के यादगार उदाहरण हैं। उन्होंने हिंदी और देशी बोलचाल की भाषा को विज्ञापनों में लाकर उसे आम जनता के करीब किया। उनके काम में हास्य, गर्मजोशी और मानवता का संगम दिखाई देता था।

एक सहयोगी ने कहा कि उन्होंने सिर्फ भाषा नहीं बदली, बल्कि भारतीय विज्ञापन की संरचना और भाव ही बदल दिए। अपनी बड़ी सफलता के बावजूद पांडे हमेशा विनम्र रहे। वे खुद को टीम का हिस्सा मानते थे, न कि अकेले सितारा। क्रिकेट के अपने शौक के चलते उन्होंने विज्ञापन को टीम खेल से जोड़ा।

 2018 में पियूष और उनके भाई प्रसून पांडे एशियाई कलाकारों में पहले बने, जिन्हें एक प्रतिष्ठित विज्ञापन समारोह में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके भारतीय रचनात्मकता को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के योगदान के लिए दिया गया। पियूष पांडे का निधन न केवल विज्ञापन जगत के लिए, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए भी बड़ी क्षति है, जिन्होंने उनके विज्ञापनों में अपनी जिंदगी के रंग और भाव देखे।

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